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राजा अम्बरीष की कथा (The Story Of King Ambarisha) | Shri Bhaktmaal Katha | भक्ति को गौरवान्वित करती महाराजा अम्बरीष जी की पावन कथा

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 राजा अम्बरीष की कथा (The Story Of King Ambarisha) | Shri Bhaktmaal Katha | भक्ति को गौरवान्वित करती महाराजा अम्बरीष जी की पावन कथा |    Shree Hita Ambrish Ji सर्व दुःख निवारण करती है ये कथा! ||1|| Shree Hita Ambrish Ji  श्री अम्बरीषजी   वैवस्वत मनुके प्रपौत्र तथा राजर्षि नाभागके पुत्र महाराज अम्बरीषजी सप्तद्वीपवती सम्पूर्ण पृथ्वीके   वीर  स्वामी थे और उनके ऐश्वर्यकी संसारमें कोई तुलना न थी। कोई दरिद्र मनुष्य भोगों के अभावमें वैराग्यवान् बन जाय , यह तो सरल है ; किंतु धन-दौलत होनेपर , विलासभोगकी पूरी सामग्री प्राप्त रहते वैराग्यवान् होना , विषयोंसे दूर रहना महापुरुषोंके ही वशका है और यह भगवान्‌की कृपासे ही होता है । थोड़ी सम्पत्ति और साधारण अधिकार भी मनुष्यको मदान्ध बना देता है , किंतु जो भाग्यवान् अशरण-शरण दीनबन्धु भगवान्के चरणोंका आश्रय ले लेते हैं , जो उन मायापति श्रीहरिकी रूपमाधुरीका सुधास्वाद पा लेते हैं , मायाकी मादकता उन्हें रूखी लगती है। मोहनकी मोहनी जिनके प्राण मोहित कर लेती है , मायाका ओछापन उन्हें लुभानेमें असमर्थ हो जाता है । वे तो जलमे...

Raja Harishchandra Katha | Shri Bhaktmaal Katha | राजा हरिश्चंद्र कथा | कथा सागर | राजा हरिश्चद्र कथा || Raja Harishchandra Katha ||

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 Raja Harishchandra Katha | Shri Bhaktmaal Katha |  राजा हरिश्चंद्र कथा | कथा सागर | राजा हरिश्चद्र कथा || Raja Harishchandra Katha || कौन थे राजा हरिशचंद्र? | raja harishchandra ki kahani |  राजा हरिश्चंद्र को सत्यवादी और महादानी क्यों कहा जाता है? ... सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र की लोक कथा  श्रीहरिश्चन्द्रजी   सूर्यवंशमें त्रिशंकु नामके एक प्रसिद्ध चक्रवर्ती सम्राट् हो गये हैं , जिन्हें मुनि विश्वामित्रने अपने योगबलसे सशरीर स्वर्ग भेजनेका प्रयत्न किया था । महाराज हरिश्चन्द्र उन्हीं त्रिशंकुके पुत्र थे । ये बड़े ही धर्मात्मा , सत्यपरायण तथा प्रसिद्ध दानी थे । इनके राज्यमें प्रजा बड़ी सुखी थी और दुर्भिक्ष , महामारी आदि उपद्रव कभी नहीं होते थे। महाराज हरिश्चन्द्र के यशसे त्रिभुवन भर गया । देवर्षि नारद के मुखसे इनकी प्रशंसा सुनकर देवराज इन्द्र ईर्ष्यासे जल उठे और उनकी परीक्षाके लिये मुनि विश्वामित्र से प्रार्थना की । इन्द्रकी प्रार्थनापर प्रसन्न होकर मुनि परीक्षा लेनेको तैयार हो गये ।   -  महामुनि विश्वामित्र अयोध्या पहुँचे। राजा हरिश्चन्द्र से ...

भक्त ध्रुव की कथा (Story Of Bhakt Dhruv) | Bhaktmal Katha | ध्रुव की कथा | भक्त श्री ध्रुवजी की कथा - ध्रुव चरित्र - Bhakt Dhruv Story

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 भक्त ध्रुव की कथा (Story Of Bhakt Dhruv) | ध्रुव की कथा | भक्त श्री ध्रुवजी की कथा - ध्रुव चरित्र - Bhakt Dhruv Story |    ध्रुव कोंन थे |  ध्रुव तारा की कहानी |  ध्रुव तारा की दिशा |  ध्रुव तारा कैसे बना ?  श्रीधुवजी   ध्रुव स्वायम्भुव मनुके पौत्र थे। महाराज उत्तानपादकी बड़ी पत्नी सुनीतिकी कोखसे उनका जन्म हुआ था। एक समयकी बात है , राजदरबार लगा था। महाराज उत्तानपाद अपनी छोटी रानी सुरुचि एवं उसके पुत्र उत्तमक साथ राजसिंहासनपर विराजमान थे। सुरुचिके रूप लावण्यने राजाको वशीभूत कर लिया था । सुरुचिकी रुचि ही उत्तानपादकी रुचि हो गयी थी। एक दिन पाँच वर्षका बालक ध्रुव अपने सखाओंके साथ खेलता - खेलता राजसभामें जा पहुँचा । अपने छोटे भाई उत्तमको पिताकी गोदमें बैठे देखकर बालक ध्रुवने भी पिताकी गोदमें बैठना चाहा। सुरुचि इसे कैसे सहन कर सकती थी ? सुनीतिसे उसका सौतियाडाह जो था । ' अरे , तुम्हारा इतना साहस ! यदि पिताकी गोदमें बैठना चाहते हो तो तपस्या करक...