राजा अम्बरीष की कथा (The Story Of King Ambarisha) | Shri Bhaktmaal Katha | भक्ति को गौरवान्वित करती महाराजा अम्बरीष जी की पावन कथा
राजा अम्बरीष की कथा (The Story Of King Ambarisha) | Shri Bhaktmaal Katha | भक्ति को गौरवान्वित करती महाराजा अम्बरीष जी की पावन कथा | Shree Hita Ambrish Ji सर्व दुःख निवारण करती है ये कथा! ||1|| Shree Hita Ambrish Ji श्री अम्बरीषजी वैवस्वत मनुके प्रपौत्र तथा राजर्षि नाभागके पुत्र महाराज अम्बरीषजी सप्तद्वीपवती सम्पूर्ण पृथ्वीके वीर स्वामी थे और उनके ऐश्वर्यकी संसारमें कोई तुलना न थी। कोई दरिद्र मनुष्य भोगों के अभावमें वैराग्यवान् बन जाय , यह तो सरल है ; किंतु धन-दौलत होनेपर , विलासभोगकी पूरी सामग्री प्राप्त रहते वैराग्यवान् होना , विषयोंसे दूर रहना महापुरुषोंके ही वशका है और यह भगवान्की कृपासे ही होता है । थोड़ी सम्पत्ति और साधारण अधिकार भी मनुष्यको मदान्ध बना देता है , किंतु जो भाग्यवान् अशरण-शरण दीनबन्धु भगवान्के चरणोंका आश्रय ले लेते हैं , जो उन मायापति श्रीहरिकी रूपमाधुरीका सुधास्वाद पा लेते हैं , मायाकी मादकता उन्हें रूखी लगती है। मोहनकी मोहनी जिनके प्राण मोहित कर लेती है , मायाका ओछापन उन्हें लुभानेमें असमर्थ हो जाता है । वे तो जलमे...